
अवध की शान – आपकी अपनी पहचान
अर्पित सिंह श्रीवास्तव वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य सम्पादक
अम्बेडकरनगर जनपद के सरकारी शराब की दुकानों के ठेका आवंटन के बाद 31 मार्च क्लोजिंग के बाद 1 अप्रैल से खुलने के पहले से कई स्थानों पर महिलाओं द्वारा दुकान न खोले जाने के लिए विरोध किया जा रहा है।
उक्त विरोध प्रदर्शन को जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक, द्वारा गम्भीरता से ले लिया गया है। जिसके बाबत देशी शराब की दुकान स्थित सोनगांव (चनवा चौराहा) में विरोध कर रही महिलाओं व पुरूषों के विरूद्ध अनुज्ञापी/ठेकेदार द्वारा एफ०आई०आर० दर्ज करायी गयी है।
जिनकी गिरफ्तारी अविलंब की जायेगी प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शराब की दुकानें सरकारी होती है तथा सरकारी नीति के अनुसार इसका संचालन कराया जाता है। नियम संगत होने पर किसी भी व्यक्ति को दुकान संचालन में व्यवधान पैदा करने की कोशिश करने वालों के विरूद्ध एफ०आई०आर० दर्ज कर शख्त कार्यवाही की जायेगी।
उक्त आदेश के बाबत यहां तक जिक्र कर दिया गया है कि सरकारी दुकानों के संचालन में किसी व्यक्ति द्वारा धरना प्रदर्शन कर व्यवधान उत्पन्न न किया जाय। उक्त निर्देश उल्लिखित रूप से जिला आबकारी अधिकारी, अम्बेडकरनगर के द्वारा किया गया हैं।
प्रश्न खड़ा होना भी लाज़मी है कि किसी महिला के आस पड़ोस में अगर सरकारी देशी य अंग्रेजी शराब की दुकान स्थित हो और उनके घर के अगल बगल सरकारी शराब की दुकान से दारूबाजों द्वारा दारू खरीद कर इर्द गिर्द पी के हंगामा किया जाए और महिलाओं से से अभद्रता की जाए तो क्या यह भी सही है।
हालांकि इस संदर्भ में की अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। अब बात यह उठनी भी लाज़मी है कि आबादी के बीचों बीच क्या शराब की दुकान का संचालन करना ठीक है। राजस्व की प्राप्ति के लिए जनहानि का नुकसान करना किस हद तक ठीक है यह अनुमान जिलाधिकारी अविनाश सिंह को लगाना चाहिए।